• flash-5.jpg
  • flash-11.jpg
  • flash-21.jpg
  • flash-31.jpg

अनुक्रम-४३

1. संपादकीय यह अंक- प्रियंवद 

2. अतिथि संपादकीय - बसंत त्रिपाठी 

3. आधार वक्तव्य: प्रतिरोध के अलावा कोई विकल्प नहीं - लाल्टू 

4. संगमन समाहार वक्तव्य : इस देश की संवेदना एक है - गिरीराज किशोर

5. सारी दुनिया का साहित्य मध्यवर्ग का साहित्य है - प्रभात त्रिपाठी

6. साहित्य और प्रतिरोध की परस्परता - ईश्वर दोस्त

7. प्रतिरोध के आंदोलन से संगठित बुद्धिजीवियों का रिश्ता खत्म हो गया -  श्रीपाद जोशी

8. प्रतिरोध और रचनात्मकता का रिश्ता - प्रकाश चंद्रायन

9. प्रतिरोध को लोक के बीच ले जाने की जरूरत- राजकुमार राकेश

10. आज के समय में मीडिया का चरित्र - आनन्द प्रधान

11. मराठी सिनेमा के नए दौर में दबी-कुचली जातियों के युवाओं की अभिव्यक्ति - विरा साथीदार

12. महाराष्ट्र में प्रबोधन की परंपरा - वसंत आबाजी डहाके

13. विकास नीति एवं वर्तमान भारतीय कृषकों की समस्याएँ - विजय जावंधिया

14. किसान केन्द्रित कविताओं पर हावी मध्यवर्गीय दृष्टि -  सियाराम शर्मा

15. प्रतीकों में खुद को विद्रोही मानना गलत है - प्रकाश दुबे

16. जेण्डर का सवाल - सोमा सेन

17. कला पर एक बातचीत - गोपाल नायडू 

18. प्रतिपक्ष की कविता का स्वरूप और विचारधारा - नाासिर अहमद सिकंदर

19. असंतोष में ही रचनात्मकता का जन्म - उपासना

20. दलित साहित्य की पृष्ठभूमि और उसका महत्व - लोकनाथ यशवंत

21. लेखन के जरूरी किन्तु उपक्षेति मुद्दे -  कैलाश वानखेडे

22. प्रतिरोध के रचनात्मक रूपांतरण की सच्ची संभावनाएँ - मनोजकुमार पांडेय

23. हमारे समय में रचना और प्रतिरोध - कैलाश बनवासी

24. बात बस इतनी है कि हम अभी लड़ नहीं रहे -  शिवेन्द्र

25. रचना में न्यायबोध की मांग - राकेश मिश्रा

26. लेखन केवल लेखन भर नहीं, बल्कि एक 'एक्टिव पार्टीसिपेशन' हो - मिथिलेश प्रियदर्शी